• About Us Dainik DIRASHYA
  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Terms And Conditions/Dainik dirashya
  • June 18, 2021

उन हवाओं के झोंको को कैसे भूलें

दैनिक दृश्य

दैनिक दृश्य

उन हवाओं के झोंको को कैसे भूलें ,

जो बना गये जीवन को बगिया ,

फूलों को उसमें उगा गये ,

फिर फूलों की तरह हमको  ,

महकना  हमको सीखा गये बनकर जो सतरंगी इन्द्रधनुष , बेरंगी जीवन में उतरकर ,

जिन्दगी को रंगीन बना गये ।

बनकर आए तुम सब ,

हमारे जीवन में अवतार लिया , उदासी में डूबे हुए रहते ,

हंसी का उपासक बना गये ,

हर जीत मुकम्मल हो जाएगी ,

सपने देखने की इच्छाशक्ति जगा गये ,

डरना क्या इस दुनिया से ,

हिम्मत का फौलादी बना गये।

हर अन्धकार की कीमत को ,सुबह की रोशनी की किरण चुका लेगी ,सब्र से रात को गुजरने दो ,

अन्धकार में भी चलना हमको सीखा गये ,

जीवन में जब-जब रात हुई ,तब तब कोई साथ नहीं ,

उस क्षण के भी तुम साथी थे ,

हर पल का साथ निभा गये।कब मिलेगा ना जाने साथ तुम्हारा ,

जो साथ मिला अनमोल रहा ,ना सगा था ना सोतेला था ,वो रिश्तों का घर सच्चा था ,

आबाद रहो खुशहाल रहो , हर ग़म से तुम अनजान रहो , जीवन में सबको मिले सफलता , राहों को हमारी सफल तुम बना गये ।

Share and Enjoy !

0Shares
0

SHAHANAJ KHAN

शहनाज़ खान दैनिक दृश्य की सह-संस्थापक एवं सम्पादक है इन्हें लिखने का शौक है। अपनी कविताओं को भी जल्द ही आप तक पहुंचाने का प्रयास करुंगी। धन्यवाद

Read Previous

वोटर आईडी कार्ड ने भी रखा डीजिटल दुनिया में क़दम

Read Next

उम्मीदें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0Shares
0