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  • June 18, 2021

मनुष्य में श्रेष्ठ एवं निम्न होने की पहचान कैसे करें।

“मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है” यूनान के प्रसिद्ध विचारक अरस्तू का यह कथन है। इसी कथन को यदि अंग्रेजी में अनुवाद किया जाए तो (Man is a social animal) मनुष्य एक सामाजिक पशु है। लेकिन मनुष्य अपनी विभिन्न विशेषताओं के कारण अन्य सभी प्राणियों से भिन्न  है।

इन्हीं विशेषताओं के कारण उसे सबसे अलग स्थान प्राप्त है । हमें हमेशा अपने सही अर्थों में मनुष्य होने के कर्तव्यो का पालन करना चाहिए। यदि फिर भी कोई मनुष्य मुर्खता वाले कार्य करता है तो उसे बिना पूंछ और सींग वाला एक पशु समझा जाता है। क्या अन्तर होता है मनुष्य और पशु समान मनुष्य में आइए जानें।

मनुष्य और मुर्ख

मनुष्य और मुर्ख मनुष्य में सबसे बड़ा अन्तर यह होता है कि मनुष्य के अन्दर धर्मपरायणता होती है।

धर्म का अर्थ किसी जाति-धर्म से नहीं है बल्कि दया-दृष्टि से है।

जो मनुष्य अपने मानव धर्म की रक्षा करते हैं वहीं मनुष्य कहलाने के योग्य हैं।

जो पर-जीवों पर दया करते हैं वो ही मनुष्य हैं।

यदि किसी जीव की आत्मा को हमारे कारण दु:ख होता है तो हम धर्म का उल्लंघन कर रहे हैं और यदि हम किसी जीव की आत्मा को दु:ख नहीं पहुंचाते हैं तो हम धर्म का पालन कर रहे हैं।

मनुष्य के श्रेष्ठ एवं निम्न होने का अनुमान उसके व्यवहार से लगाया जा सकता है। यदि मनुष्य कुसंगति में बैठता है तो वह दुराचार,पापचार आदि दुर्गुणों का शिकार हो जाता है। जिससे उसकी बुद्धि का नाश हो जाता है, बुद्धि के अभाव में मनुष्य इस संसार में एक पल भी नहीं रह सकता। कुसंग के समान सर्वनाशक और कुछ नहीं है। उच्च की संगति से मनुष्य ऊंचा उठ जाता है और हीन की संगति से हीनता आती है। मनुष्य  कहलाने के लिए मनुष्य के अन्दर धर्म एवं शील का होना आवश्यक है अन्यथा वह पशु के समान है।

मानवता के प्रति साहनूभुति

मनुष्य में यदि मानवता के प्रति पारस्परिक स्नेह नहीं हो तो वह सच में एक पशु के समान है।

क्योंकि पशुओं में ही इस प्रकार की प्रवृत्ति पाई जाती है।

हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा है

 “यही पशु प्रवृत्ति है कि आप ही आप चरे  ,वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।”

स्नेह सज्जन व्यक्तियों का आभुषण होता है और कूक्रता दुर्जन व्यक्ति का । पशुओं में देखा जाता है कि उनमें पारस्परिक सहयोग या स्नेह की भावना का अभाव होता है।

महाभारत में भी कहा गया है”जहां अनुभव ना हो वहां स्नेह काम आता है।”

उदारता मनुष्य को एक अलग पहचान देती है। मनुष्य अपनी उदारता के कारण समाज में शांति का वातावरण बना लेता है। यदि मनुष्य के अन्दर ये गुण नहीं होता है।तो समाज की स्थिति एक जंगल के समान होती है जहां की व्यवस्था अस्त व्यस्त होती है और मनुष्य एक पशु के समान।

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SHAHANAJ KHAN

शहनाज़ खान दैनिक दृश्य की सह-संस्थापक एवं सम्पादक है इन्हें लिखने का शौक है। अपनी कविताओं को भी जल्द ही आप तक पहुंचाने का प्रयास करुंगी। धन्यवाद

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