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ग्राम पंचायतों के मुख्य अधिकार क्या हैं। क्या अधिकार है प्रधान के जिन्हें पाकर गांव को विकास के पथ पर लाया जा सकता है।

ग्राम पंचायत दिवस

ग्राम पंचायत दिवस

ग्राम पंचायतों के मुख्य अधिकार क्या हैं। क्या अधिकार है प्रधान के जिन्हें पाकर गांव को विकास के पथ पर लाया जा सकता है।

गांव में प्रधानी के चुनावों की तैयारी जोरों पर है। सभी अपने अपने चहेते को सपोर्ट कर रहे हैं परन्तु अभी तक हमें यह नहीं पता कि गांव में जिसको चुन रहे हैं। क्या उसे अपने अधिकारों का पता है।वह जिस पद के लिए उम्मीदवार बनकर जनता से वोट मांग रहे हैं। उनके अधिकार क्या है।

गांव के विकास के लिए योजनाएं कौन बनाता है। ये योजनाएं आम आदमी तक कैसे पहुंचे।

भारत गांवों का देश है जहां छोटे छोटे सपने पलते हैं। जहां देखने को मिलता है सुन्दर भारत। इन्हीं ग्राम पंचायतों से भारत विकास के पथ पर अग्रसर हो रहा है। यदि योजनाओं को धरातल पर सही ढंग से लागू कर दिया जाये तो उन्नत ग्राम पंचायत की आधारशिला मजबूत चट्टान बनकर सामने आयेगी। यदि भारत को विकास के पथ पर अग्रसर करना है तो ग्रामीण अंचलों को अभी से विकसित करने के लिए और प्रभावी प्रयास करने होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर शिक्षा क्षेत्र में अधिक ध्यान देने की जरूरत है।किसी भी भी क्षेत्र को विकसित करने के लिए मुख्य केंद्र शिक्षा ही होती है। ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना भी आर्थिक स्थिति को ठीक करने में ग्रामीणों को अच्छा विकल्प है यदि इसे सही मायने में ईमानदारी से धरातल पर लागू किया जाये। ग्राम पंचायत विकास योजना।इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों की विकास की धुरी भी कह सकते हैं ‌।

  1. वातावरण निर्माण (ग्राम सभा का आयोजन)
  2. पारिस्थितिकीय विश्लेषण
  3. आवश्यकताओं/समस्याओं की पहचान एवं प्राथमिकताओं का निर्धारण
  4. ग्राम पंचायत में विकास योजनाओं का निर्धारण करना।
  5. प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति।

इन्हें ग्राम प्रधान पंचायत राज विभाग के साथ मिलकर ग्राम पंचायतों में विकास की झड़ी लगा सकते हैं। ग्राम प्रधान का मूल उद्देश्य यदि गांव के विकास पर रहे तो गांव की व्यवस्था में चार चांद लग सकते हैं। यदि ग्राम प्रधान बोलेरो की चकाचौंध में रह गया तो वह गांव का विकास तो बहुत दूर अपने भविष्य पर भी ग्रहण लगा रहा है।

गांव को आत्मनिर्भरता की और ले जाने का आधार तैयार करना।

गांव में आत्मनिर्भरता कैसे हासिल किया जाये? ये सवाल कुछ कठिन सा लग रहा है परन्तु यह उतना ही आसान है। यदि हम आज शुरुआत कर दें तो ये जटिल समस्या बड़ी आसानी से हल कर सकते हैं।

हमें सबसे पहले ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए योजनाएं तैयार करना चाहिए। ये ऊर्जा हमें हवा पानी सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करना चाहिए।इस योजना को कैसे हासिल किया जाए इसके बारे में कभी विस्तार से जानकारी दी जायेगी।

पंचायती राज व्यवस्था का संक्षिप्त इतिहास ग्राम पंचायत में अतीत से वर्तमान तक।

उत्तर प्रदेश में पंचायतों के विकास का प्रथम चरण 1947 से 1952 -53।

संयुक्त प्रांत पंचायत राज अधिनियम 1947 दिनांक 7 दिसंबर 1947 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षरित हुआ और प्रदेश में 15 अगस्त 1949 से पंचायत की स्थापना हुई इसके बाद जब देश का संविधान बना तो उसमें पंचायतों की स्थापना की व्यापक व्यवस्था की गई संविधान में राज्य से नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 40 में गए हैं कि राज्य पंचायतों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठाए और ग्रामीण स्तर पर सभी प्रकार के कार्य एवं अधिकार उन्हें देने का प्रयत्न करें 15 अगस्त 1949 से उत्तर प्रदेश की तत्कालीन 5 करोड़ 40 लाख ग्रामीण जनता को प्रतिनिधित्व करने वाली 35000 पंचायतों में कार्य करना प्रारंभ किया साथ ही लगभग 8000 पंचायत अदालतें स्थापित की गई।

सन 1951 में ग्राम सभाओं की संख्या बढ़कर 35943 तथा पंचायत अदालतों की संख्या बढ़कर 8492 हो गई सन 1952 से पंचायतों ने ग्रामीण जीवन में सुनो जी स्तर पर राष्ट्र निर्माण का कार्य करना आरंभ किया योजना की सफलता के लिए शासन द्वारा पंचायत अदालत स्तर पर विकास समितियों के सदस्य मनोनीत किए गए। ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत मंत्री विकास समिति का भी मंत्री नियुक्त किया गया। जिला नियोजन समिति में भी प्रत्येक तहसील से एक प्रधान मनोनीत किया गया।1952-53  में जमीदारी विनाश के पश्चात गांव समाज की स्थापना हुई और गांव सभा के अधिकार बढ़ाये गये।

ग्राम पंचायतों किसान विकास में निरंतर प्रयासरत रहे पंचायतों के विकास का दूसरा चरण 1953 54 से 1959 -60 तक चला।

 पंचायतों के विकास का तीसरा चरण 19 सौ 61 से 1971 -72 तब चला।

पंचायतों के विकास का चौथा चरण 1972 -73 से 1981- 82 तक चला।

पंचायतों के विकास का पांचवा चरण 1983- 84 से 1992 -93।

ग्राम पंचायतों के विकास का छठवां चरण 1993-94.

 

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anwar khan

अनवार खान दैनिक दृश्य के संस्थापक एवं सम्पादक हैं ये अपने अनुभव से देश दुनिया में हो रही सामाजिक व्यवस्था अव्यवस्था को अपने शब्दों में लिखकर वेब पोर्टल पर प्रकाशित करते हैं। केवल सच्ची खबरें, कहानी, किस्से, यात्राओं के विरतान्त, आंखों देखी घटनाओं को अपने शब्दों में, क्या हुआ, कहा हुआ,कब हुआ, कैसे हुआ, किसने किया आदि विन्दुओ पर अपने विचार, टीका टिप्पणी और संदर्भ में भी लेखन करते हैं।

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