तुमने लवों को अपने क्यूं बन्द रखा है।

तुमने लवों को अपने क्यूं बन्द रखा है।

तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है।
पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है ।
चाहत हो तुम मेरी ये दुनियाँ को बता दो।
क्या है ये कहानी दुनियाँ को सुना दो।
मोहब्बत की कहानी को यहाँ नज़रबन्द रखा है।
तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है।
पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है।
निगाहों से बार तुमने ह्रदय में किया है।
मिलती नहीं दबा वो जख्म दिया है।
जख्मी जिगर को हमने बुलन्द रखा है।
तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है।

पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है।

मासूम मुहब्बत का अब जनाजा ही उठेगा।
पहुँचेगा सीधा मरकज़ ना अब यहाँ रूकेगा।
महकज में फ़रिश्तों ने क़लमबन्द रखा है।
पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है
तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है।

महफ़िल में हिफाजत की फरियाद कर रहा।
मुश्किल घड़ी में वेताब तुम्हें याद कर रहा।
कर दे तेरी हिफाजत अनवर ने वो छन्द रचा है।
तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है।
पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है।

 

 

 

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