मेरी पहली महाराष्ट्र की यात्रा ।

साल का तीसरा महीना चल रहा था मुझे अपने बड़े भाई ने पुकारा और कहा कि मुंबई चलना है ।

पहलीबार मुंबई जाने का अवसर मिल रहा है मैं मना भी नहीं कर सकता इसलिए मैंने हामी भर दी ।

मन उत्साह ओर उमंग अपने चरम पर थी ।

चलनेकी तैयारी होने लगी आखिर वो दिन भी आ गया जब मैं ओर मेरे भाई ओर उनके साथ हमारे साथी हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से मुंबई के लिए रवाना हुए ।

रेलगाड़ीने अपनी गतिविधियों में परिवर्तन करना शुरू कर दिया ओर मुंबई की ओर प्रस्थान कर दिया ।

गाड़ी अपने निर्धारित समय पर अपने गन्तव्य स्थान पर पहुंच गई हम भी अपने मूल स्थान पर पहुंच गए।

अब हमारा वातावरण तो थोड़ा डण्डा ओर यहाँ का वातावरण गर्म तो भाई मोषम अपना काम कर रहा था।

हम अपना कोई परेसानी नहीं सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था ।

अचानक एक दिन हमारे प्रधानमंत्री जी अपने जितने भी संचार के माध्यम है के द्वारा जनता को सम्बोधित करते हुए अपील करते हैं कि एक दिन का लौकडाऊन है ।

हमेंकोई परेसानी नहीं सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था अगले ही दिन फिर संचार के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जनता को सम्बोधित करते हुए ।अपील करते हैं कि लौकडाऊन को आगे बढ़ाना होगा क्योंकि कि कोरोना महामारी है ।

जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं है ।अब हम सभी असमंजस में पड गये अब क्या होगा अब हमारे मन मस्तिष्क में वही विचार आ रहे थे जो सभी के मन में थे जीवन का पहिया जो चल रहा था ।

अचानक धीरे-धीरे रूकने लगा लोगों में भय का माहौल बनने लगा लोग अपने अपने कार्यस्थल से अपने अपने गाँव की ओर चलने लगे।

परिवहनके सभी साधन बन्द जिनके पास अपने वाहन वो तो चल निकले परन्तु इनमें भी पैदल चलने वालों की संख्या ज्यादा थी ।

लोग अपने अपने तरीके से लोगों की मदद कर रहे थे ।

हम लोगों की इस तरहा की तस्वीर सोसल मीडिया के माध्यम से देख ओर सुन रहे थे ।

हमारे साथियों ने भी पैदल चलने का प्लान बनाया परन्तु हिम्मत नहीं जुटा पाये की पैदल चल सकें ।

खैर घर तो पहुंचना था कैसे भी पहुंचे प्लानिंग शुरू हो गई क्या करना है क्या नहीं करना है रास्ते में क्या करना है, किन वस्तुओं की आवश्यकता होगी सारे प्लानिंग के बाद हम गाड़ी किराये पर लाये । 

भाडा करने वाली गाड़ी आज हमें लेकर जा रही है हम महाराष्ट्र से अपने राज्य उत्तर प्रदेश के अपने ग्रह जनपद अपने गाँव बिना किसी रुकावट के पहुंच गए ।

लेकिन भय का भूत तो यहाँ भी पहुंच चुका था वही हुआ जो सबके साथ हो रहा था क्वारन्टीन ले गये एफ आई आर सबकुछ हुआ क्वारन्टीन के दिनों का विवरण बाद में बताऊंगा ।उसके बाद का सफर,,,,,,,,,,,,

जब मैं अपने घर था ।मेरे अन्दर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी ।

आप सभी बहुत अच्छी तरहा जानते हैं कोरोना वायरस महामारी के कारण आज सारा संसार अपने दैनिक कार्यों को स्थर कर अपने अपने घरों में कैद हो गया है ।

इस महामारी के कारण प्रत्येक मनुष्य को अपनी नीतियों को बदलने को मजबूर कर दिया है चाहे वो राजनैतिक हो, चाहे व्यवसायिक संस्था हो, चाहे कोई उद्योगपति हो,चाहे मजदूर हो सबको अपनी दैनिक दिनचर्या में परिवर्तन करने के लिए मजबूर कर दिया है ।

आज सभी अपने अपने घरों में कैद से हो गये हैं ।

उद्योग धन्धों में उत्पादन धीमे पड रहा है क्योंकि बाजारों में रोनक खत्म हो गई है ।सभी ने अपने खर्चे करने में हाथ खींच लिए है लोगों की जेबों में मुद्रा का आना बन्द हो गया है क्योंकि सामुहिक रूप से कार्य करने की इजाजत नहीं है ।

क्योंकि पब्लिक में वायरस  हस्तांतरण का खतरा बढ सकता है ।

गाँव देहात की पब्लिक में भी भय का माहौल है सभी अपने अपने घरों में रहकर सिर्फ खेती का कार्य कर रहे हैं परन्तु खेती अब बची कितनी है ।

अधिकांश ग्रामीणों को शहर के उद्योगों में कार्य कर रहे थे जोकि आज मजदूर नहीं होने के कारण उत्पादन क्रिया धीमी गति से हो रही है या फिर बन्द पडे हैं ।

यदि ये उद्योग धन्धे नहीं चले तो देश ओर दुनिया के सामने आर्थिक संकट सामने आ खडा होगा ।

इन उधोग धन्धों को गति देने के लिए मजदूरों को बाहर आना चाहिए अपने आपको आर्थिक संकट से निपटने के लिए खुद को तैयार कर लेना चाहिए ।

मैं भी अपने घर था बहुत जरूरी कार्य से बाहर निकलता था।

बीते कल में ओर मेरे साथियों ने घर से बाहर निकल कर कार्य करने की हिम्मत कर घर से बाहर चल दिए।

अपने घर से गाँव में होते हुए अपने गन्तव्य स्थान की ओर चलने लगे रास्ते में छोटे छोटे कस्बे, शहर से हम गुजर रहे थे ।

वहां कुछ जगहों को छोडकर बाकि सब जगह स्थिति सामान्य रूप से चल रही है बाजारों में इतनी भीड़ तो नहीं है ।

परन्तु इतनी भी कम नहीं है कि बाजार रोशन नहीं हो आवश्यक वस्तुओं की दुकानें के साथ अन्य वस्तुओं की दुकानें प्रत्येक दिन खुल रही है ।

इनदिनों बाजारों में वही लोग आ रहे हैं जिनके पास बहतर जमा पूंजी का भण्डारण है ।

आम आदमी के पास तो इतना मुद्रा भंडारण क्षमता नहीं कि वो अपने बच्चों को एक वक्त का पौष्टिक भोजन मुहैया करा सके ।

सरकार खाद्यान्न तो उपलब्ध करा रही है परन्तु उसकी सही मात्रा उस मजदूर तक नहीं पहुंच पा रही।

जिसका वो हकदार है ।आम आदमी या मजदूर सिर्फ कोटेदार तक सीमित है ।

वो उसकी शिकायत भी नहीं कर सकता क्योंकि यहाँ पर सभी के हाथों में कालिख लगी हुई है ।

सबके पास एक निश्चित हिस्सा समय से पहले पहुंच जाता है ये सब कार्य पर्दे के पीछे से होता है।

एक और डर शिकायकर्ता को रहता है लोग अपनी पावर का दुरुपयोग कर उसका हनन करते हैं।

मजबूर यह सोच कर जो जैसा कर रहा है उसकी सजा उसे ईश्वर देगा ऐसा सोचकर अपने नित कार्यों में लग जाता है ।

अपनी सामान्य जीवन जीने लग जाता है बदबू फैलाने वाले बदबू फैलाने लगे रहते हैं ।

हमें अपने अपने बच्चों के बहतर जीवन जीने के लिए काम करने के लिए घरों से बाहर निकल कर आना ही होगा ।

आपने जीवन जीने के लिए काम करना होगा ।किसी भी काम को करने के लिए बाहर जाना होगा नियमों का पालन करते हुए आपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए ।

घरों में आप कब तक रहकर खा सकते हैं जब तक आपके पास मुद्रा है।

मुद्रा खत्म फिर तुम्हें बाहर निकलना ही पडेगा ।इसलिए आप अपने आपको सबसे पहले मानसिक रूप से मजबूत करो फिर नियमों का पालन करने की आदतें बनाओ निकलो अपने कार्य करने के लिए जियो नये जमाने के साथ करिये एक बहतर शुरूआत मृत्यु एक सत्य है आएगी तो घरों में रहकर भी आयेगी ।

आप अपने परिवार हिंसक प्रवृति को मत अपनाओ आप अपने ध्यान को अपनी आजीविका चलाने के लिए अपने कार्य पर लगाओ ।

इसलिएअपने कार्य को बड़ी सावधानीपूर्वक गति दीजिये एक बहतर जीवन जीने की शुरुआत करिये ।

लेखक के अपने विचार हैं ।

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