मेरे गीत गजलों का संकलन ।

वफ़ा का रास्ता देकर मोहब्बत आज रोती है ।

 

 

मोहब्बत चीज क्या यारो पता किसी को होती है।

मेरे भी साथ हुई खिलबाड एक परदेश में वेवफ़ा भूल गई हमको निगाहें साफ़ कहती है।

वफ़ाका रास्ता देकर मोहब्बत आज रोती है

मोहब्बत चीज क्या यारो पता किसी को होती है

समझ कर अपना जिसको हाले दिल कह डाला दगावाज तोड़ गई दिल को मन में ये खीज होती है

वफ़ा का रास्ता देकर मोहब्बत आज रोती है

मोहब्बतचीज क्या यारो पता किसी को होती है

मोहब्बत तोहफा है दिल का इसे स्वीकार कर लेना समझकर प्रेम की तस्वीर इसे दिल में फ्रेम कर लेना

प्रेम के सागर की यही तफसीस होती है

मोहब्बत चीज क्या यारो पता किसी को होती है
तराने तेरे वेताब सभी के दिल में छाये है तरन्नुम साथ में रखकर अनवर भी आये हैं
सजा जो प्यार की पाई वो अब माफ होती है
वफ़ाका रास्ता देकर मोहब्बत आज रोती है
मोहब्बत चीज क्या यारो पता किसी को होती है ।

 

 

रट्टू तोता ।मैं रट्टू तोता हूँ ,रटना मेरा काम नहीं।
अपनी सिखवत पास रखो ,ये कोई इम्तहान नही।
सुबह-सुबह की बात बताऊँ एक कौआ आया घर पे
 मुझमें ऐसी कमी क्या जो ये दुनिया मुझ पे भड़के
मेरा स्वर कसरीला है तो इसमें मेरा क्या दोष।
सब मुझको टरकाते है फिर भी मैं हूँ खामोश।
मुझपर जो विश्वास करो तुम ऐसे इन्सान नहीं।
मैंरट्टू तोता हूँ रटना मेरा काम नहीं।
भरी सभा में इज्जत लूटें उनको सरपंच बना डाला
सरपंची का राग ना जाने फिर ये प्रपंच रचा डाला
अब सूखी डाली पर क्यूँ तुम पत्ते हरे उगाते हो
खाकेदूध मलाई को तुम उसमें ज़हर बताते हो
थूकताक के उसे चाटना ये मेरा ईमान नहीं
मैं रट्टू तोता हूँ रटना मेरा काम नहीं
विश्वासके धागे क्यूँ टूटे ये तुमको बतलाता हूँ।
बिखरे मोती कैसे बीने ये तुमको समझाता हूँ।
जोमोती को जोड़े रख्खे धागा वही कहलाता है।
बिखरे मोती जोड़ दिये ये विश्वास कहलाता है।
धागेकी जो कीमत जाने बो कोई बेईमान नहीं।
मैं रट्टू तोता हूँ रटना मेरा काम नहीं।
अस्सीसौ की उम्र आ गई सिर पर बनीं सफेदी है।
घरकी बातें मन में रखले वरना लंका भेदी।
सोच समझ कर कदम उठाओ  आगे कुआ खाई है।
बोकिस्मत वाला है जिसके पास बहन ओर बड़ा भाई है।आपस में तुम बिखरे डोलो ये घर की कोई शान नहीं।
मैं रट्टू तोता हूँ रटना मेरा काम नही।

 

इन्टरनेट का दौर

लगता है जिन्दगी इन्टरनेट हो गई।
वोआज हमको छोड़ कर कहीं और सैट हो गई।
पिछलेसाल से ही तो फेसबुक चैट हो रही
डेटा खर्च करते-करते मेरी जेब हेट हो रही
फिरभी मेरी चाह वहाँ वेट हो गई
लगता है जिन्दगी इन्टरनेट हो गई
महीने की सारी कमाई चैटिंग गई
दादेलाई सम्पत्ति सब सेटिंग में गई
मोहब्बत का जो आज कोल किया वो भी लेट हो गई लगता है जिन्दगी इन्टरनेट हो गई
काश वो हमारे शब्दों को तरजीह दे देते
प्रेम के दो शब्द अनवर भी कह देते
ऐसे ही शब्दों से जिन्दगी सर्वश्रेष्ठ हो गई।
लगता है जिन्दगी इन्टरनेट हो गई

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