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  • October 25, 2021

किसी नरसंहार की ओर इशारा कर रही है जन्तर मन्तर की कहानी

जन्तर मन्तर पर नारेबाजी करते हुए लोग जिनके नाम अज्ञात है

किसके साथ है आप यह कहना मुश्किल है आज की तारीख में आप क्यों मौन साधे हुए हैं।

 

सोसल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां आये दिन कुछ ना कुछ वायरल होता ही रहता है। इसके माध्यम से कुछ सकारात्मक ऊर्जावान वायरल सूचनाएं देखने पढ़ने को मिलती हैं तो कभी कभी ऐसी घटनाएं भी सामने आ जाती है जिनका असर समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

 

ऐसी घटनाएं समाज में असन्तोषजनक स्थिति उत्पन्न कर देती हैं। लोग ऐसी घटनाओं को रोकने के बजाय उनको आगे फैलने में भागीदारी निभाते हैं बल्कि उसका पुरजोर तरीके से समर्थन भी करते हैं।समाज के बुद्धिजीवियों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनी प्रतिक्रिया देने से पहले ही किसी दूसरे बुद्धिहीन व्यक्ति की प्रतिक्रिया आ जाती है।

 

ऐसे मनहूस मानव जीवन को प्रभावित करने का हर वो मौका ताड़ते रहते हैं जिसमें फूहड़ता फसाद का जहर घुला हुआ हो।समाज के लिए ऐसी घटनाएं बहुत ही घातक साबित हो रही हैं।इन असामाजिक घटनाओं को फ़ैलाने वाले भीड़ का हिस्सा बनकर ऐसी उलजलूल हरकतें करते हैं ताकि इनकी पहचान छिपी रहे।

 

इन असामाजिक तत्वों को अप्रत्यक्ष रूप से कहीं ना कहीं उच्च पदों पर विराजमान संगठित व्यक्तियों का साथ होता है। मैं इस बात को पूरजोर तरीके से कह सकता हूं कि इनके लिए संवैधानिक पदों पर विराजमान व्यक्तियों का समर्थन होता है। क्योंकि जब भी ये उन्मादी भीड़ समाज में अशांति फैलाते हैं तो इन बुद्धिजीवियों के तरफ से निन्दा तक नहीं की जाती है। कानूनी कार्रवाई तो दूर की बात है।

 

अगर इतनी उर्जा को हम सही जगह इस्तेमाल किया जाए तो समाज की स्थिति कुछ और ही होती।हम इस सोच को आगे बढ़ा नहीं सकते क्योंकि इन परिस्थितियों के कारण ही तो मलाई खाने को मिलती है। यदि वाकई समाज का उत्थान चाहते हैं तो हमें इन उलजलूल हरकतें करने वाले लोगों को रोकना होगा।इनको जहां पहुंचने की आवश्यकता है वहां पहुंचाने के लिए जागरूक होना होगा। अन्यथा आने वाले समय में स्थिति और भी भययुक्त होगी।

 

अभी पिछले दिनों दिल्ली जन्तर मन्तर के मैदान से एक वीडियो सोसल मीडिया पर वायरल होता है जिसे देखकर तो ऐसा लग रहा है कि मानो आने वाले समय में किसी बड़े नरसंहार कराने की ओर इशारा कर रहा है। यहां कानून बड़ी सुस्ती से कार्य कर रहा है। कानून को जहां तत्परता दिखाने की जरूरत है वहां नरम रवैया कैई सवाल खड़े कर रहा है।

 

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