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  • October 25, 2021

एक सुनहरे भविष्य की बुनियाद आज रखें ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुनहरा अवसर मिल जाए

बहतर कल बनाने के लिए सुनहरे भविष्य की बुनियाद आज ही रखें ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुनहरा अवसर मिल जाए आगे बढ़ने का।

 

मैं और मेरे भाई हम कम्पनी के लिए काम करने गुजरात राज्य के कच्छ जिले के छोटे से नगर अंजार में पहुंच चुके थे।

वहां हम लगभग चालीस दिन कार्य किया परन्तु इस अवधि में हम कार्य को पूरा नहीं कर सके जिसका मुख्य कारण कम्पनी का स्टेकचर का कार्य अभी पूरा नहीं किया गया था।

जिसके कारण हमें अपना कार्य रोकना पड़ा था और हम इस बात को लेकर चिंतित थे कि हमें यहां आये बीस दिनों से ज्यादा हो गये परन्तु कार्य करने की गतिविधियां बहुत ही धीमी गति से संचालित हो रही थी।

इसका एक ओर भी कारण था साइड पर कार्य करने वाले मजदूरों का पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होना था जोकि कोरोनावायरस के कारण अपने गांव लौट गये थे।

 

मैं अपने मुख्य विषय पर वापस आता हूं मैं जिस जगह पर कमरा लेकर रह रहा था उस गांव का नाम बरषामेढी यह गांव हाईवे पर बसा हुआ है यहां से कांडला एयरपोर्ट नजदीक है और गांधीधाम रेलवे स्टेशन भी काफी नजदीक है।

 

एक बार हम सभी भाई इस गांव में बनी मस्जिद में जुमे की नमाज़ अदा करने गये तो वहां हम सबसे पहले मस्जिद में दाखिल हुए।मोषम काफी गर्म था।कमरे से मस्जिद तक का सफर पैदल ही तय किया था जिसकी वजह से हम पशीने से तर-बतर थे।धोडी देर आराम किया और बुजू कर हम नमाज़ की सुन्नत अदा कर फारिग हुए।अब नमाजियों की संख्या धीरे धीरे बढ़ रही थी। मस्जिद के इमाम साहब ने अपनी तकरीर शुरू कर दी।इसी दरमियान एक सख्स नीचे से उठकर इमाम साहब से कुछ अपील करता है। इमाम साहब उनकी इस अपील को उसी वक्त बुलन्द आवाज से ऐलान कर देते हैं कि ये सहाब फलाने गांव से तसरीफ लाये है।

 

ये पेशे से उस गांव की मस्जिद में मौअज्जिन है और इनकी बेटी का फलानी तारीख में निकाह होगा इनके लिए पैसों की जरूरत है जिस भाई पर जो भी मदद बन सके इनकी मदद करो। नमाज़ अदा करने के बाद मौअज्जिन सहाब के लिए जिस पर जो बन सका सबने अपने अपने स्तर पर पैसे से मदद की।समाज में जो प्रमुख समस्या है उसको ही ख़त्म कर दिया जाये। मैं इस विषय को लेकर चिंतित हुआ।

समाजमें जो दहेज के नाम पर लूट मची हुई है उसको खत्म कर दिया जाये तो किसी बाप को अपनी बेटी के निकाह के लिए इस तरह से पैसे मांगने की आवश्यकता नहीं होती।

 

आज समाज में जो कुरितियां फैली हुई है समय रहते इन को नहीं रोका गया तो समाज एक आर्थिक रूप से कमजोर होता चला जायेगा।इन विसंगतियों को दूर करने के लिए हमें एक जुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है। अगर समाज में बदलाव देखना चाहते हैं तो हम युवा नोजवान पीढ़ियों को जागरूक होना होगा। हमें अपनी सोच को बदलना होगा।समाज में पनप रही विसंगतियों को पहचान कर उनको दूर करना होगा। आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था को हम युवा नौजवानों को ही बढ़ावा देना होगा।

 

समय रहते हम नौजवान नहीं जागे तो हम सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक हर मुद्दों पर विफलताओं में धंस जाएंगे।हम अपना ध्यान इन मुद्दों पर केन्द्रित करते हैं तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणास्रोत बन जाएंगे। आने वाली पीढ़ियां इस कार्य को दूने उत्साह से आगे बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे। हमें जरूरत है एक सकारात्मक ऊर्जावान सोच की बुनियाद रखने की ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुनहरा कल मिल जायेगा।

 

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