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Category: काव्य कुंज

काव्य कुंज
शायद ही आए फिर

शायद ही आए फिर

शायद ही आए फिर कुछ पैदल चलने दो मुझे को कहीं क़दम वहक ना जाए फिर आज़ के पल पर हक़ मेरा जी लेने दो शायद ही कल आए फिर ये मेरा है ,वो पराया…

काव्य कुंज
          ।      कुछ रंग    ।

          ।   कुछ रंग ।

       ।   कुछ रंग । कुछ रंग आंगन में दे आए , कुछ रंग वहां से ले आए  हम थे ही इतने अलबेले , हंसते-गाते हम चले आए कुछ धूमिल थे कुछ…

Politics
शहीदी दिवस पर विशेष  भगतसिंह , सुखदेव और राजगुरु  का शहीदी दिवस

शहीदी दिवस पर विशेष  भगतसिंह , सुखदेव और राजगुरु  का शहीदी दिवस

शहीदी दिवस पर विशेष: भगतसिंह ,सुखदेव और राजगुरु  का शहीदी दिवस। आज भगतसिंह , सुखदेव और राजगुरु के अदम्य साहस और बलिदान का दिन है।आज ही के दिन 23 मार्च 1931 की शाम को 7…

काव्य कुंज
उड़ान

उड़ान

     उड़ान      बढ़ तु समन्दर पार कर   ,                                                घोर  लहरों…

Long Title Post
भारत के शेक्सपियर का दर्शन एक दृष्टि में।

भारत के शेक्सपियर का दर्शन एक दृष्टि में।

भारत के शेक्सपियर का दर्शन एक दृष्टि में।   हमारा भारत  विश्व गुरु कहा जाता है। क्योंकि  हमारे भारतीय इतिहास को अनेक प्रचण्ड , प्रतिभाशाली विद्वानों ने प्रकाशित किया है। वेदव्यास , भवभूति , बाणभट्ट,…

काव्य कुंज
तुमने लवों को अपने क्यूं बन्द रखा है।

तुमने लवों को अपने क्यूं बन्द रखा है।

तुमने लवों को अपने क्यूं बन्द रखा है। तुमने लबों को अपने क्यूँ बन्द रखा है। पाकीजा मोहब्बत पे ये दण्ड रखा है । चाहत हो तुम मेरी ये दुनियाँ को बता दो। क्या है…

मनुष्य में श्रेष्ठ एवं निम्न होने की पहचान कैसे करें।

“मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है” यूनान के प्रसिद्ध विचारक अरस्तू का यह कथन है। इसी कथन को यदि अंग्रेजी में अनुवाद किया जाए तो (Man is a social animal) मनुष्य एक सामाजिक पशु है। लेकिन…

काव्य कुंज
आधुनिक युग की मीरा

आधुनिक युग की मीरा

“पीड़ा की गायिका” या फिर “आधुनिक युग की मीरा” के नाम से जानी जाने वालीं “महादेवी वर्मा” जी हिन्दी साहित्य में अपना विशेष स्थान रखतीं हैं। इनकी रचनाओं के करुणा और भावुकता अभिन्न अंग हैं।…

काव्य कुंज
धरती के वृक्ष

धरती के वृक्ष

कह रही गरम हवा मंथन से , कहाॅं गये हमारे साथी । क्या उन्हें कैद किया , या आयी परेशानी । एक चिड़िया पंख फड़फड़ा कर ,बैठ गई मेरे पास। पूछा कहाॅं गये वो मतवाले…

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धरती के वृक्ष

धरती के वृक्ष

कह रही गरम हवा मंथन से , कहाॅं गये हमारे साथी , क्या उन्हें कैद किया , या आयी परेशानी । एक चिड़िया पंख फड़फड़ा कर ,बैठ गई मेरे पास , पूछा कहाॅं गये वो…

काव्य कुंज
उम्मीदें

उम्मीदें

तुम मिल जाओ इस आशा में ,मन सावन की रिमझिम बारिश करता है , कितने    सावन    बीत   गये  , कितने  अभी  भी  बाकी  हैं । आसमान   से   कोई  तारा , टुटे   तो    बतला   देना…

काव्य कुंज
उन हवाओं के झोंको को कैसे भूलें

उन हवाओं के झोंको को कैसे भूलें

उन हवाओं के झोंको को कैसे भूलें , जो बना गये जीवन को बगिया , फूलों को उसमें उगा गये , फिर फूलों की तरह हमको  , महकना  हमको सीखा गये बनकर जो सतरंगी इन्द्रधनुष…

काव्य कुंज
मेरे जीवन का आधा हिस्सा तुम हो

मेरे जीवन का आधा हिस्सा तुम हो

मेरे    नवनीत    स्वप्न , मेरी  बंजर  भूमि  की फसल , ऐसे  मुझको  मिले  तुम हो , मेरे जीवन का आधा हिस्सा तुम हो । मेरे  आगे  बढ़ने  का  सफ़र , शुरू और  आखिरी  मंजिल ,…

काव्य कुंज
मौसम चले जाते हैं

मौसम चले जाते हैं

    मौसम चले जाते है फिजाएं छोड़कर । रखतीं हूं जिनसे  उम्मीदें चले जाते हैं तोड़कर ।  जिन्दगी रात की नींद होती है । हम खो देते हैं खुशियां हर रोज़ जानकर।  कहानी एक…

news
प्रसंग अधूरा रह गया

प्रसंग अधूरा रह गया

प्रसंग अधूरा रह गया।

काव्य कुंज
ऐसा चाहूं मैं भारत महान

ऐसा चाहूं मैं भारत महान

जहां ख्वाबों का भी समन्दर बहता हो , जहां प्रेम की नदियां करें कलरव  , तिरंगे को करती रहूं मैं सलाम , वात्सल्य धरती से हो दिन रात , जन्नत के गुण धरती पर हो…

Lifestyle
मेरा मन

मेरा मन

मेरा मन भी करता है,चिड़िया की तरह बन जाऊं। मेरा मन भी करता है, बादलों की तरह घिर आऊं।        मेरा मन भी करता है,मोर और कोयल की तरह नाचूं,गाऊं। मेरा मन भी करता है,सावन में…

news
नारी के अस्तित्व की वास्तविक रक्षा

नारी के अस्तित्व की वास्तविक रक्षा

यत्र: नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र: देवता: अर्थात् जहां नारी की पूजा (सम्मान) होता है वहां पर देवता निवास करते हैं, ऐसा नारी के विषय में मनुस्मृति में कहा गया है। पृथ्वी के समान भार गृहण…

Entertainment
एक हवा चली थी नोटों की हम घर में दीवार बना बैठे।

एक हवा चली थी नोटों की हम घर में दीवार बना बैठे।

एक हवा चली थी नोटों की हम घर में दीवार बना बैठे। जिस समां को हमने जन्म दिया उस समां से घर को जला बैठे। ख्वाब सजाये थे माँ ने जिस घर को महल बनाने…

Entertainment
राहे वफ़ा

राहे वफ़ा

राहे वफ़ा  वफ़ा का रास्ता देकर मोहब्बत आज रोती है  मोहब्बत चीज क्या यारो पता किसी को होती है  मेरे भी साथ हुई खिलबाड एक परदेश में  वेवफ़ा भूल गई हमको निगाहें साफ़ कहती है…

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