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आयशा आरिफ खान सुसाइड केस? क्या कहा आयशा ने आत्महत्या करने से पहले?

आयशा आरिफ खान

आयशा आरिफ खान का फ़ाइल फोटो

 

आयशा आरिफ खान सुसाइड केस

आयशा आरिफ खान की आत्महत्या समाज के लिए सवाल खड़े कर गयी है?निकाह को आसान बनाओ?अपने अख्लाख सम्भालो।

क्या कहा आयशा ने आत्महत्या करने से पहले।

हेलो अब्बू,,,,,,,,,,,

मैं जा रही हूं मैं अब जीना नहीं चाहती।

सोचने वाली बात है एक एक बेटी अपने अब्बू को अपने सुसाइड करने की इतला अपने फोन से काल करके देती है?उस पिता पर उस वक्त क्या गुजरी होगी। कैसे अपने आप को सम्हाल होगा।

 

कब हुई थी आयशा आरिफ खान की शादी।

साल दो हजार अट्ठारह में हुई थी। आयशा आरिफ खान की शादी। अहमदाबाद के रहने वाले पिता लियाकत अली पैशे से एक टेलर हैं।

उन्होंने बताया कि बेटी का निकाह साल 2018 जालौर राजस्थान के रहने वाले आरिफ खान से हुआ था।

लेकिन शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा शादी के कुछ महीनों बाद ही आरिफ दहेज की मांग करने लगा।

दहेज की मांग पूरी ना होने के कारण आयशा को आरिफ मायके छोड़ गया था। बाद में रिश्तेदारों के समझाने पर आयशा को अपने साथ ले गया।

परंतु फिर 2019 में उसने फिर से आयशा को परेशान किया और मायके छोड़ गया। आरिफ और उसके घर वाले ₹150000 की मांग कर रहे थे।

किसी तरह से पैसे का इंतजाम कर पैसे दे भी दिए परंतु आयशा और आरिफ की फोन पर जो बातचीत हुई उस बातचीत से  आयशा बहुत ही हताश हो गई थी।

जिसके चलते उसने इस कदम को उठाया हमने लाख कोशिशें की उसे समझाने की परंतु वह हमारी बात नहीं मानी।

क्या बातचीत हुई थी आरिफ और आयशा के बीच फोन पर जिससे आयशा हताश हो गई।

मृतका आयशा के पिता ने बताया की आरिफ और आयशा की कुछ दिन पहले फोन पर बातचीत हुई थी।

जिसमें आयशा ने गुस्से में खुदकुशी करने की धमकी दी जिसकी प्रतिक्रिया आरिफ ने कुछ इस तरह दी थी।

कि मरना है तो जा कर मर जा इसी बात से आयशा बेहद आहत हो गई और आखिरकार उसने आत्महत्या कर ली।

 

 

अस्लामालैकुम मेरा नाम है आयशा आरिफ खान है और मैं जो कुछ भी करने जा रही हूं। अपनी मर्जी से करने जा रही हूं।

इसमें किसी का जोर या दबाव नहीं है। क्या कहें अब,ये समझ लें कि खुदा की दी ज़िन्दगी इतनी ही होती है? मुझे इतनी ही जिन्दगी बहुत शुकून वाली मिली।ओ डियर डैड ए कब तक लड़ेंगे अपनों से,केस विड्रा कर लो,,,,,,,,

आयशा लड़ाईयों के लिए नहीं बनी प्यार करते हैं आरिफ से उन्हें परेशान थोड़ी ना करेंगे। अगर उसे आजादी चाहिए तो ठीक है वो आज़ाद रहे।चलो अपनी जिन्दगी तो यहीं तक है।

मैं ख़ुश हूं कि मैं अब अल्लाह से मिलूंगी। उन्हें कहूंगी कि मेरे से गलती कहां रह गई?माॅं बाप बहुत अच्छे मिले, दोस्त बहुत अच्छे मिले।

मुझमें एक कमी रह गई मुझमें या सायद तकदीर में। मैं खुश हूं शुकून से जाना चाहति हूं। अल्लाह से दुआ करती हूं कि अब दुवारा इन्सानों की शक्ल ना दिखाए ।

एक चीज जरुर सीखी है कि मोहब्बत करनी है तो दोतरफा करो एकतरफा में कुछ हासिल नहीं। कुछ मोहब्बत तो निकाह के बाद भी अधूरी रह जाती है।ऐ प्यारी सी नदी प्रे करती हूं कि ये मुझे अपने में समा ले।

मेरे पीठ पीछे जो भी हो प्लीज ज्यादा बखेड़ा मत करना। मैं हवाओं की तरह हूं बस बहना चाहती हूं।बहते रहना चाहती हूं।

किसी के लिए नहीं रुकना, मैं खुश हूं आज के दिन क्यों कि मुझे जिन सवालों के जवाब चाहिए थे वो मुझे मिल गये। ओर मुझे जिसको जो बताना था सच्चाई मैं बता चुकी।थैंक्यू मुझे दुओं में याद रखना। क्या पता जन्नत मिले ना मिले।

चलो अल विदा।

आयशा आरिफ खान
आयशा आरिफ खान का फ़ाइल फोटो

 

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anwar khan

अनवार खान दैनिक दृश्य के संस्थापक एवं सम्पादक हैं ये अपने अनुभव से देश दुनिया में हो रही सामाजिक व्यवस्था अव्यवस्था को अपने शब्दों में लिखकर वेब पोर्टल पर प्रकाशित करते हैं। केवल सच्ची खबरें, कहानी, किस्से, यात्राओं के विरतान्त, आंखों देखी घटनाओं को अपने शब्दों में, क्या हुआ, कहा हुआ,कब हुआ, कैसे हुआ, किसने किया आदि विन्दुओ पर अपने विचार, टीका टिप्पणी और संदर्भ में भी लेखन करते हैं।

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