दिमाग का खेल समझदार को इशारा काफी है।

आज एक एक घटना याद आ रही है जो कि अतीत में गुजर चुकी है वो घटना विस्तार से समझाता हूं आपको समझ आये तो ठीक नहीं आये तो ठीक। ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी है सीधे मुद्दे पर चलता हूं।
एक बार मैं और मेरे अज़ीज़ दोस्त होस्टल में हसी मज़ाक कर रहे थे। सर्दियों का मोषम था तो शाम और दोपहर में कोई विशेष अन्तराल नहीं होता कब दिन निकला और कब रात हो जाती सुर्य को तो जवान होने का मौका ही नही मिलता सुर्य को तो यह पता नहीं चलता कि उसकी गर्मा गर्म धूप की जबानी कब शहीद हो गयी।


हम दस पन्द्रह लड़कों का समूह एक साथ इकठ्ठा हो कर बीते सप्ताह में किसने किस होटल में फोकट की दाबत का आनंद लिया। फोकट की दाबत से शुरू हुई चर्चा कब फिल्मीस्तान की दुनिया में धंस गई और ये पता नहीं चला कि कब शाम शहीद हो कर रात्रि परवान चढ़ गयी। सर्दी ने अपना आवरण फेलाना शुरू कर दिया। चर्चा में हम सब कुछ भूलकर अपने अपने गांव में क्या क्या होता है इसको लेकर फिर चर्चा होने लगी।


समूह के बीच में आकर किसी सीनियर ने अपने रुम में रखे रद्दी पेपर में आलाब सुलगा दिया। पेपर में कितना समय तक अग्नि उत्पन्न रहती वो भी सर्दी के मौसम में। खैर जब चर्चा लम्बी चल निकली तो अलाब को भी साथ साथ लम्बा चलना था।अब यहां कोई गांव तो था नहीं कि बिटोडे में से उपले निकाल कर अलाब ऊंचा किया जा सके।अब होस्टल के एक कोने में टुटा हुआ तख्त पडा था तो आज उसको मुक्ती मिलना तय था।तख्त को ये मुक्ति हफ्ते भर में मिलनी थी एक दो ऊपर के फट्टे ही बचे थे। इधर तख्त को मुक्ति मिल रही थी उधर वार्डन का चार्ज छोड़ने का निर्णय सूचना पट पर टंग गया।


नये वार्डन को चार्ज देने से पहले वार्डन ने सभी छात्रों के कमरे में रखे सामान की सूची बनाकर निरीक्षण करना शुरू किया सभी के कमरों के सामान पुरे परन्तु एक तख्त साहब को नज़र नहीं आ रहा था अब हंगामा खड़ा होना लाजमी था।


वार्डन ने हॉस्टल के सभी छात्रों को प्रांगण में बुला लिया अब फोकट में दाबत उड़ानें वाले समूह में मायूसी साफ झलक रही थी अब किया होगा।
खैर जब खुराफात है तो उसका हल भी निकालना था सब कुछ तुरन्त ही करना था।तख्त को लेकर सभी छात्रों से वार्डन की वार्तालाप चल रही थी इसी अन्तराल में किसी खुराफाती छात्र ने कालिज की ओर से उपलब्ध सामग्री के दस्तावेजों में परिवर्तन कर दिया जिसमें तख्त को तख्ता बना दिया। वार्डन बदलते रहे और खुराफाती छात्र अपनी खुराफात करता रहता था ।

उसने तख्त को तख्ता, तख्ता से तख्ती बना कर बचे हुए फट्टे में सुन्दर करिगरी करवाकर सुनहरे अक्षरों में लिखवा दिया था। इस तख्ती का निर्माण श्री भागमल उठापटक रौबदार जबरसिंह प्रधानाचार्य के कर कमलों में दिनदहाड़े फलां तारीख को हुआ।
@anwarkhan

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