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  • June 18, 2021
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Tag: साहित्य

काव्य कुंज
शायद ही आए फिर

शायद ही आए फिर

शायद ही आए फिर कुछ पैदल चलने दो मुझे को कहीं क़दम वहक ना जाए फिर आज़ के पल पर हक़ मेरा जी लेने दो शायद ही कल आए फिर ये मेरा है ,वो पराया…

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