True line

आँखो से आँसुओ में, मेरा प्यार बह रहा।
वेबफाई का ये दर्द, मै कैसे सह रहा।
दिल की ये बात,अपनी जुबां पर ना ला सका।
दर्दों से भरी दासताँ,ना उनको बता सका।
कैसे हैं मेरे जख्म,ना जमाने से कह रहा।
आँखो से आँसुओ में,मेरा प्यार बह रहा।

जख्मी तिज़ारत को,मैंने जरिया बना लिया।
मिलते रहे घाटे,फिर भी दिल में सज़ा लिया।
आयेगा मुनाफा लोटके,मेरा इन्तजार कह रहा।
आँखो से आँसुओ में,मेरा प्यार बह रहा।

नफ़रत की निशानी को बेताब मिटा दे।
मोहब्बत किताबों में एक नाम लिखा दे।
शर्मीली निगाहों से अनवर ये कह रहा।
आँखो से आँसुओ में,मेरा प्यार बह रहा।

Dainik Dirashya

 

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anwar khan

अनवार खान [email protected] दैनिक दृश्य के सम्पादक हैं ये अपने अनुभव से देश दुनिया में हो रही सामाजिक व्यवस्था अव्यवस्था को अपने शब्दों में लिखकर वेब पोर्टल पर प्रकाशित करते हैं। केवल सच्ची खबरें, कहानी, किस्से, यात्राओं के विरतान्त, आंखों देखी घटनाओं को अपने शब्दों में, क्या हुआ, कहा हुआ,कब हुआ, कैसे हुआ, किसने किया आदि विन्दुओ पर अपने विचार, टीका टिप्पणी और संदर्भ में भी लेखन करते हैं।

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