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 होली पर्व  अपने लिए कितना महत्वपूर्ण त्यौहार है।

होली पर्व अपने लिए कितना महत्वपूर्ण त्यौहार है।

अपनों के बीच होली पर्व का रंग

होली पर्व  अपने लिए कितना महत्वपूर्ण त्यौहार है।

 

होली आने वाली है। ये त्यौहार बड़ा अलबेला है। इस त्यौहार घर में गुझिया , कचौड़ी इत्यादि खाद्य सामग्रियों का पहेरा रहता है। सबसे बड़ी बात यह त्यौहार हमें रंग में रंग देता है।हम हर रंज और गम भूलकर सभी के साथ हर्ष से ये त्यौहार मनाते हैं।इस दौरान गुलाल का , प्यार का , विश्वास का रंग आंगन और मन पर छाया होता है।

ये त्यौहार तो हर्ष और उल्लास का पर्व होते हैं। कोई भी त्यौहार हो ईद हो , होली हो , चाहें दिवाली हो उसका अर्थ समान ही होता है। त्यौहारों का अर्थ होता है कि“हमारे अंदर प्रेम , संस्कृति , सभ्यता , सहानुभूति  आदि गुण जीवित हैं। त्यौहार मानवता जीवित है का प्रतीक होते हैं।

ये तो रही त्यौहारों की बात । जिस प्रकार त्यौहार आने से चारों तरफ का वातावरण उल्लासित हो उठता है । ठीक उसी प्रकार ही मेरा मन है। मेरे पास जब तक मेरे अपने संपर्क में रहते हैं तब तक मेरे अंदर कोई भी नकारात्मक विचार प्रवेश नहीं कर पाता है। लेकिन अब ,मेरे अपने त्यौहारों की तरह है जो कभी-कभी विशेष अवसरों पर ही आते हैं।

मेरी सकारात्मक उर्जा का स्रोत मेरे अपने हैं। जिस प्रकार हमारी त्यौहार हमारे संस्कार ,संस्कृति की जीवित रहने का प्रतीक होते हैं। ठीक वैसे ही, मेरे अंदर की वास्तविकता को जीवित रखने के लिए “मैं जीवित हूं”का प्रतीक मेरे अपने हैं। मेरी अपनों से थोड़ी दूरी होने पर ही मेरे अंदर नकारात्मकता का वास हो जाता है। अगर मैं सही राह जा रही हूं तो मेरे अपने मुझसे जुड़े हुए हैं और यदि मैं किसी राह से भटक रही हूं तो मेरे अपनों ने मुझसे दूरी बना ली है।

मेरी बुद्धि का विकास नहीं हुआ है वह अभी भी कच्ची अवस्था में ही है। उसे जिधर चाहे मोड़ा जा सकता है। इसलिए मुझे समय-समय पर मार्गदर्शन की आवश्यकता है। प्रयत्न करने से क्या संभव नहीं है।

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SHAHANAJ KHAN

शहनाज़ खान दैनिक दृश्य की सह-संस्थापक एवं सम्पादक है इन्हें लिखने का शौक है। अपनी कविताओं को भी जल्द ही आप तक पहुंचाने का प्रयास करुंगी। धन्यवाद

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