Capacitor Kiya hai? केपैसिटर क्या है।Capacitor in Hindi?केपैसिटर को हिन्दी में क्या कहते हैं? Capacitor ko Hindi main kiya kahte Hain . What is capacitor? केपैसिटर कैसे काम करता है।What is capacitor in Hindi

Capacitor ka namuna photo from canva

What is capacitor in Hindi what is capacitor in Hindi? केपैसिटर क्या है हिन्दी में बताओ?केपैसिटर कैसे काम करता है।केपैसिटर से क्या फायदा है?केपैसिटर क्यों लगाते हैं? ऐसे ही अनेक सवाल आपके पास होंगे।

Capacitor Kiya hai. What is capacitor.क्या होता है केपैसिटर।

केपैसिटर विद्युत परिपथ में प्रयुक्त होने वाला दो सिरों वाला एक प्रमुख अवयव है।

दो या दो से अधिक चालकों को एक विद्युत रोधी माध्यम के द्वारा अलग अलग करके समीप रखा जाए तो यह व्यवस्था केपैसिटर capacitor कहलाती है। इन चालकों पर बराबर तथा विपरीत आवेश होते हैं।

What is capacitor in Hindi? Capacitor in Hindi. केपैसिटर को हिन्दी में क्या कहते हैं।

Capacitor ko Hindi main sandharitra kahte hai. केपैसिटर को हिन्दी में संधारित्र कहते हैं।

एक संधारित्र capacitor एक या दो टर्मिनल में विद्युत उपकरण है।केपैसिटर में विद्युत आवेश के रुप में उर्जा को संग्रहित करने की क्षमता होती है । संधारित्र में दो कंडक्टर होते हैं जो दूरी होते हैं।

केपैसिटर कैसे काम करता है।

केपैसिटर विद्युत ऊर्जा से चलने वाले सभी उपकरणों को एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। अर्थात केपैसिटर विद्युत ऊर्जा को अपने पास कुछ क्षण के लिए रोककर रखता है और आवश्यक ऊर्जा को अपने आप आगे भेजता है।

कैपेसिटर एक प्रबन्ध है जिसमें दो चालकों के मध्य डाइलैक्ट्रिक इन्सुलेटिंग पदार्थ लगा होता हा क इलेक्ट्रिकल एनर्जी को एकत्रित करना होता है और आवश्यकता के समय इससे इस एनजी को ले लिया जाता है|

इसमें मुख्य रूप से चालक और इन्सुलेटिंग पदार्थ होते हैं। यह चालक टिन, एल्युमिनियम आदि धातु होती है। इन्सुलेटिंग पदार्थ माइका, एबोनाइट, वायु आदि होते हैं। दोनों प्लेटे एक-दूसरे के समानान्तर होती हैं जिनके मध्य में इन्सुलेटिंग पदार्थ लगाया जाता है। इस इन्सुलेटिंग पदार्थ के कारण दोनों चालक या प्लेंटे एक-दूसरे से मिल नहीं पाती हैं। दोनों के सिरों से टर्मीनल निकाले जाते हैं। 

दो प्लेंटें समानान्तर में लगी दिखाई गई हैं जिसमें एक स्विच और एक बैट्री भी लगी होती है। बैट्री का पॉजिटिव सिरा एक प्लेट A से और दूसरा सिरा दूसरी प्लेट B से लगा होता है।

जब स्विच S को ऑन किया जाता है तो सर्किट में करन्ट का क्षणिक प्रवाह होता है जिससे कैपेसिटर चार्ज हो जाता है। प्लेट Aपॉजिटिव एवं प्लेट B नेगेटिव । बैट्री का नेगेटिव सिरा, प्लेट B को इलैक्ट्रोन्स सप्लाई करता है और उसे निगेटिवली चार्ज कर देता है। कैपेसिटर में स्थिर वैद्युतिक प्रेरण क्रिया’ (Electro Static Induction Action) के कारण प्लेट B. प्लेट A के कछ इलैक्ट्रोन्स को दूर विकर्षित कर उसे पॉजिटिवली चार्ज कर देती है। ये विकर्षित इलैक्ट्रोन्स, बैटी के पॉजिटिव सिरे के द्वारा आकर्षित कर लिए जाते हैं। इस प्रकार, बैट्री के निगेटिव सिरे से पॉजिटिव सिरे की ओर इलैक्ट्रोन्स के क्षणिक प्रवाह के कारण कैपेसिटर चार्ज हो जाता है।

कैपेसिटर की प्लेट्स के बीच एक विभवान्तर (P.D.) विकसित हो जाता है। यह विभवान्तर अपने शिखर मान तक पहुँचने में कुछ समय लेता है और इसी समय में चार्जिग करन्ट अपने शिखर मान से शून्य पर पहुँच जाती है। यदि अब कैपेसिटर को बैट्री से पृथक कर दिया जाए और इसकी प्लेट्स को एक तार से ‘शॉर्ट-सर्किट’ कर दिया जाए तो विद्युत चिंगारी पैदा होती है। यह चिंगारी सत्यापित करती है कि कैपेसिटर में चार्ज उपस्थित था। कैपेसिटर के चार्ज हो जाने पर हम देखते हैं कि-

(I) प्लेट A से प्लेट B की ओर सर्किट के माध्यम से इलैक्ट्रोन्स के स्थानान्तरण के फलस्वरूप ही कैपेसिटर में चार्ज एकत्र होता है।

(Ii) सर्किट में केवल क्षणिक करन्ट ही बहती है परन्तु डी.सी. लगातार सर्किट में नहीं प्रवाहित हो सकती। 

(Iii) जब तक कैपेसिटर में चार्ज मौजूद रहता है तब तक उसका डाइलैक्ट्रिक तनाव (Strain) युक्त रहता है।

(Iv) किसी डाइलैक्ट्रिक की प्रति मिलीमीटर मोटाई के लिए अधिकतम किलो वोल्ट मान जो वह सुरक्षित रूप से सह सकता है। उसकी डाइलैक्ट्रिक स्ट्रैन्थ कहलाती है।

 

 

 

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